लक्ष्मण त्याग, निष्ठा और भक्ति की प्रतिमूर्ति कैसे बने
श्रीराम के भ्राता लक्ष्मण: त्याग, निष्ठा और भक्ति की प्रतिमूर्ति भारतीय धर्म, संस्कृति और इतिहास में रामायण एक अत्यंत पवित्र और प्रेरणादायी ग्रंथ है। इस महाकाव्य के प्रत्येक पात्र ने समाज को कोई न कोई गूढ़ संदेश दिया है। रामायण के ऐसे ही एक महानायक हैं श्री लक्ष्मण — भगवान श्रीराम के छोटे भाई, जिन्होंने न केवल अपने भ्रातृ-प्रेम का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत किया, बल्कि त्याग, सेवा, निष्ठा और वीरता की अमिट छाप भी छोड़ी। जन्म और पारिवारिक पृष्ठभूमि लक्ष्मण जी का जन्म अयोध्या के राजा दशरथ और रानी सुमित्रा के पुत्र रूप में हुआ था। उन्हें भगवान विष्णु के शेषनाग का अवतार माना जाता है। लक्ष्मण का अपने भ्राता श्रीराम से विशेष स्नेह था। उन्होंने सदैव श्रीराम की सेवा को ही अपना धर्म माना और उनके हर सुख-दुख में साथ निभाया। वनवास में साथ जब श्रीराम को 14 वर्षों का वनवास मिला, तो लक्ष्मण ने भी अपने सुख-सुविधाओं का परित्याग कर, उनके साथ वनवास जाने का संकल्प लिया। उन्होंने केवल अपने भाई के प्रति प्रेम ही नहीं, बल्कि धर्म और कर्तव्य की पराकाष्ठा को भी दर्शाया। वनवास के दौरान लक्ष्मण ने सीता माता और श्रीराम...