क्या अंतर है श्री राधा और श्री रुक्मिणी में?
श्री राधा और श्री रुक्मिणी का अंतर भारतीय संस्कृति और सनातन धर्म में श्रीकृष्ण की लीलाओं का वर्णन असीम और अद्भुत है। श्रीकृष्ण के जीवन में अनेक देवी स्वरूपाओं का विशेष स्थान है, जिनमें प्रमुख हैं – श्रीराधा और श्रीरुक्मिणी। दोनों ही श्रीकृष्ण की परम प्रेयसी और अर्धांगिनी मानी जाती हैं, किंतु इनके बीच कुछ विशेष अंतर भी हैं। १. स्वरूप और पहचान श्रीराधा – राधा जी को श्रीकृष्ण की आध्यात्मिक शक्ति कहा गया है। वे भक्ति, प्रेम और माधुर्य की प्रतिमूर्ति हैं। राधा जी का उल्लेख मुख्यतः भागवत महापुराण में प्रत्यक्ष रूप से नहीं मिलता, किंतु पुराणों, उपनिषदों और आचार्यों की भक्ति परंपरा में उनका विशेष स्थान है। श्रीरुक्मिणी – रुक्मिणी जी को लक्ष्मी का अवतार माना जाता है। वे श्रीकृष्ण की पत्नी और द्वारका की रानी थीं। उनका वर्णन भागवत पुराण में स्पष्ट रूप से मिलता है। २. स्थान और भूमिका राधा जी – वे वृंदावन की अधिष्ठात्री देवी मानी जाती हैं। राधा जी और श्रीकृष्ण का प्रेम दिव्य और अलौकिक है, जो सांसारिक सीमाओं से परे है। रुक्मिणी जी – वे द्वारका की रानी थीं। उनका जीवन गृहस्थ धर्म और मर्यादा का प्...