गणपति पूजा विधि और गणेश चतुर्थी पर पूजा कैसे करें🪔
यहाँ पर एक संपूर्ण "गणपति पूजा विधि (विधि) – घर पर गणेश चतुर्थी पर पूजा कैसे करें" का हिंदी में लेख दिया गया है। आप इसे अपने उपयोग के अनुसार पढ़ सकते हैं या साझा कर सकते हैं।
🪔 गणेश चतुर्थी पर घर पर गणपति स्थापना और पूजा विधि
गणेश चतुर्थी का पर्व भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन भगवान गणेश का जन्म हुआ था। भक्तजन इस दिन श्री गणेश की मूर्ति को घर लाकर श्रद्धा पूर्वक पूजा करते हैं और 1.5, 3, 5, 7 या 10 दिन तक स्थापना करते हैं।
✨ पूजन सामग्री (Samagri) ✨
गणेश जी की मूर्ति (मिट्टी की या शुद्ध रूप से बनाई गई मूर्ति)
पूजा थाली
कलश, नारियल, आम के पत्ते
दूर्वा (21 दूर्वा आवश्यक)
21 लड्डू (मोदक या बेसन/बूंदी के लड्डू)
फल, मिठाई
पान, सुपारी, लौंग, इलायची
रोली, अक्षत (चावल), सिंदूर
अगरबत्ती, दीपक, घी/तेल
फूल (गेंदे, गुलाब इत्यादि)
पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, शक्कर)
🕉️ गणपति स्थापना और पूजन विधि 🕉️
1. स्थान की सफाई और मंडप सजाना
पूजा स्थान को साफ करें और एक चौकी पर लाल कपड़ा बिछाएं।
चौकी को फूलों और रंगोली से सजाएं।
2. गणेश जी की स्थापना
शुभ मुहूर्त में भगवान गणेश जी की मूर्ति को बैठाएं।
"ॐ गं गणपतये नमः" मंत्र का उच्चारण करते हुए मूर्ति की स्थापना करें।
3. कलश स्थापना
एक तांबे या मिट्टी के पात्र में जल भरें, आम के पत्ते लगाएं, नारियल रखें और कलश की पूजा करें।
4. संकल्प लेना (Sankalp)
जल लेकर संकल्प लें: “मैं (अपना नाम), आज गणेश चतुर्थी के पावन अवसर पर, श्री गणेश पूजन हेतु यह संकल्प करता हूँ।”
5. गणपति पूजन विधि
पूजा के क्रम में निम्नलिखित चरणों का पालन करें:
➤ अवहन और आसन देना
“ॐ गणेशाय नमः, आवाहयामि” कहकर गणेश जी का आवाहन करें।
➤ पाद्य, अर्घ्य, आचमन, स्नान कराना
पाद्य (पैर धोना), अर्घ्य (हाथ धोना), आचमन (पेय जल) और स्नान कराएं।
➤ वस्त्र, आभूषण, चंदन, अक्षत, फूल चढ़ाएं
गणेश जी को वस्त्र और फूल पहनाएं। चंदन, अक्षत लगाएं।
➤ दूर्वा चढ़ाना
गणेश जी को 21 दूर्वा चढ़ाएं, ये उन्हें विशेष प्रिय है।
➤ मिठाई और भोग अर्पण
21 लड्डू या मोदक अर्पित करें, एक लड्डू "नैवेद्य" रूप में अलग रखें।
➤ आरती करना
“जय गणेश जय गणेश देवा…” या “सुखकर्ता दुखहर्ता…” आरती गाएं।
दीपक, कपूर जलाकर आरती करें।
🙏 विशेष बातें 🙏
हर दिन गणपति जी की पूजा करें, दूर्वा और मोदक अर्पित करें।
विसर्जन से पहले “ऊँ गं गणपतये नमः” का 108 बार जप करें।
विसर्जन के दिन “पुनः आगमन” का वचन देकर गणेश जी को विदाई दें:
"गणपति बप्पा मोरया, अगले वर्ष तू जल्दी आ!"
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